Achievement

Interview With Shabash India Editor

 प्रश्न 1. आपको 16 घंटे से अधिक बोलकर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने की प्रेरणा कंहा से मिली ?

उत्तर 1. यह एक स्वप्रेरित (सेल्फ मोटीवेटेड) स्टेप था | हमेशा कुछ नया और बड़ा करने की चाह रहती है इसी सोच ने मुझे वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने के लिये प्रेरित किया |

प्रश्न 2. आप वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने का श्रेय किसे देना चाहेंगे ?

उत्तर 2. मैं हमेशा मानता हूँ व्यक्ति अपनी सफलता और असफलता के लिये सबसे अधिक खुद जिम्मेदार होता है तो अपनी जिन्दगी में होने वाले हर अच्छे और बुरे काम के लिये हमेशा मैं स्वयं को ही जिम्मेदार मानता हूँ तो इसका श्रेय भी मैं अपने आपको देना चाहूँगा लेकिन निश्चित रूप से आपकी सफलता में बहुत सारे लोगों की महती भूमिका रहती है जिसमें प्रथम मेरे गुरुदेव प्रज्ञा सागर जी मुनिराज जिनकी प्रेरणा और आशीर्वाद हमेशा मुझे हमेशा प्रोत्साहित करती है, गुरुदेव के बिना जीवन की परिकल्पना भी अधूरी है, मेरी मां जिन्होंने अपनी जिन्दगी में इतनी परेशनियाँ देखी हैं जिनका वर्णन करना मुश्किल है लेकिन मुझे कभी कोई परेशानी नहीं होने दी, मेरे मामा जी और मेरी धर्मपत्नी, जितना विश्वास मुझे मेरी क्षमताओं पर नहीं है उससे कंही ज्यादा विश्वास मेरी धर्मपत्नी को मुझ पर है, She is my motivational speaker.  साथ – साथ मेरी पूर्व कम्पनियां जिनमें मैंने काम किया उसमें भी सबसे प्रमुख “MSD INDIA” Such a great company to work and extra ordinary focus toward grooming of employees  | सभी सहयोगी संस्थायें, कोर्डिनेटर, स्पोंसर, ऑडियंस सभी के सहयोग से ही इस कार्यक्रम का सफल आयोजन हो सका |

प्रश्न 3. आपने वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने के लिये पर्सनलिटी डेवलपमेंट विषय ही क्यों चुना ?

उत्तर 3. भारतीय सामाजिक व शिक्षा व्यवस्था जंहा पढाई करके एक अच्छी नौकरी पाने का नाम ही सफलता है, जिस देश में पढाई सिर्फ नौकरी पाने के लिये की जाते है उस देश में सिर्फ नौकर ही पैदा होंगे लेकिन समस्या इससे भी बडी है क्योंकि आज बहुत सारे डिग्रीधारी लोग बेरोजगार हैं क्यों ? क्योंकि उन्होंने पढाई के आलावा अपने व्यक्तित्व का विकास के लिये कभी काम किया ही नहीं, आज के समय में पढाई के साथ – साथ व्यक्तित्व विकास की बहुत ही अधिक जरुरत है इसलिये मैंने इस विषय को चुना अगर आप अपनी जिन्दगी में सफल होना चाहते हैं बिना व्यक्तित्व विकास के संभव ही नहीं है | एक बात और जैसा की माना जाता है पर्सनलिटी डेवलपमेंट केवल स्टूडेंट्स के लिए होता है ये एक Myth है | पर्सनलिटी डेवलपमेंट हर किसी के लिये जरुरी है चाहे वह कोई भी कार्य करते हों और किसी भी Age Group के हो – Never Stop Learning Because Life Never Stop Teaching.

प्रश्न 4. सुना है 10 माह पूर्व आपका एक एक्सीडेंट हो गया था और आपको ब्रेन हम्रेज हो गया था और आपके डॉक्टर ने आपको ये स्पीच देने के लिये मना भी किया था फिर भी आपने ऐसा क्यों किया ?

उत्तर 4. आपने बिलकुल सही सुना है, जिस दिन मेरा एक्सीडेंट हुआ था वो जिन्दगी का एक बेहतरीन दिन था क्योंकि जिन्दगी में बुरा से बुरा क्या हो सकता है मृत्यु और उस समय मैंने मृत्यु को भी बड़े नजदीक से देख लिया अब उससे भी डर नहीं लगता और मेरे लिये जिन्दगी का मतलब सिर्फ जिन्दा रहना नहीं है | मेरे लिये जिन्दगी का मतलब ही सिर्फ कुछ अच्छा, नया और बडा करना है और जब तक सांस चलेगी उस अंतिम सांस तक करता रहूँगा |

प्रश्न 5. 16 घंटे से अधिक बोलने के लिये एनर्जी, मेंटल स्ट्रोंगनेस और नॉलेज होना जरुरी है इसके लिए आपने क्या किया?

उत्तर 5. जिन्दगी में सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता इस दिन को सफल बनाने के पीछे कई सालों की मेहनत लगी है या यूं कहूं तपस्या लगी है क्योंकि 16 घंटे से अधिक बिना खाये, पिये बोलना, उसके साथ – साथ किसी विषय पर दुबारा बात न हो उसका ध्यान रखना, आपकी स्पीच का इम्प्रेससिव होना निश्चित रूप से इन सभी बातों के लिये काफी मेहनत करनी पडती है |   

प्रश्न 6. इस कार्यक्रम को सफल बनाने में आपको सबसे बडी चुनौती क्या लगी ?

उत्तर 6. आज कोई डांस या म्यूजिक शो हो तो बहुत लोग आ जाते हैं लेकिन इसमें भी 16 घंटे किसी को सुनना बडा मुश्किल काम है जबकि मेरा विषय तो पर्सनलिटी डेवलपमेंट था ऊपर से उस दिन बेहिसाब शादियाँ, जयपुर में आईपीएल का मैच तो 16 घंटे से अधिक के लिए ऑडियंस का होना ये सबसे बडी चुनौती थी लेकिन पुरे 16 घंटे 18 मिनट ऑडिटोरियम पूरा भरा रहा उसमें भी कई बार तो लोगों को घंटों ऑडिटोरियम में सीट खाली होने के लिये इन्तजार करना पड़ा |

प्रश्न 7. इस कार्यक्रम की सबसे बडी सफलता क्या रही ?

उत्तर 7. जैसा की आपने अभी पूछा – चुनौती पर विजय पाना ही सबसे बड़ी सफलता थी | जो लोग सिर्फ 1 घंटे के लिये आये थे वो पुरे 16 घंटे 18 मिनट तक सुनते रहे, लोगों ने अपने आईपीएल के टिकट खरीद रखे थे फिर भी मैच देखने नहीं गये, बहुत सारे लोग शादियों में नहीं गये, कहने का मतलब है लोगों को स्पीच बहुत पसंद आई, लोगों का कहना है हमने अपनी जिन्दगी बहुत सी स्पीच सुनी लेकिन ये हमारी जिन्दगी को परिवर्तित करने वाला थी | इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रात्रि 12:40  पर जब मेरी स्पीच खत्म हुई तब भी ऑडिटोरियम में 250 – 300 ऑडियंस थे, इसके बाद कार्यक्रम लगभग सुबह 3 बजे तक चला तब तक भी सभी साथ में जुड़े रहे |

प्रश्न 8. आपको वर्ल्ड रिकॉर्ड बना कर कैसा लगा या अब तो आप सेलेब्रिटी बन गये हो आपको कैसा लग रहा है ?

उत्तर 8. आपने दो प्रश्न किये दोनों के जवाब अलग हैं, हाँ ये एक सुखद अहसास है लेकिन वर्ल्ड रिकॉर्ड नहीं भी बना पाता तो मुझे कोई अफ़सोस नहीं होता क्योंकि जीवन में मैं एक चीज को हमेशा मानता हूँ, रिजल्ट हमेशा आपके हाथ में नहीं होते लेकिन मुझे ख़ुशी है मैंने अपने Best efforts डाले और मुझे उसके अनुसार ही परिणाम मिले | बस आपको सही दिशा व सही उद्देश्य से आपको अपने प्रयास करते रहने चाहियें | आपका दूसरा प्रश्न सेलेब्रिटी बन गये हो – मैं अपने आपको सेलेब्रिटी पहले भी मानता था क्योंकि मेरी सेलेब्रिटी होने की परिभाषा अलग है | मेरी सेलेब्रिटी की परिभाषा है – जिसको अपनी जिन्दगी के पल – पल को सेलिब्रेट करना आ जाये वो सेलेब्रिटी और वो मुझे अच्छे से आता है और अब तो लोगों को भी सीखता हूँ कि सेलेब्रिटी कैसे बनें – सिर्फ नाम, पैसा आदि होने का नाम सेलेब्रिटी नहीं है, मेरे पास ऐसे बहुत से लोग आते हैं जिनका बहुत बडा नाम है, जिनके पास बहुत पैसा है लेकिन उन्हें अपनी जिन्दगी को सेलिब्रेट करना नहीं आता, मैं उन्हें सेलेब्रिटी नहीं मानता – जिसको जिन्दगी जीने की कला आ गयी वह सेलेब्रिटी है |

प्रश्न 9. अब आप आगे क्या करना चाहेंगे ?

उत्तर 9. इस प्रश्न का जवाब हमारे इंस्टिट्यूट – प्रज्ञा इंस्टिट्यूट ऑफ़ पर्सनलिटी डेवलपमेंट के विज़न में स्पष्ट झलकता है |THIS IS NOT JUST AN INSTITUTE, WE HAVE INITIATED A MOVEMENT TO CHANGE LIFE OF MILLIONS OF BHARTIYA BY CREATING AWARENESS ABOUT NEED AND IMPORTANCE OF INTERPERSONAL SKILL ENHANCEMENT”

प्रश्न 10. आपको पर्सनालिटी डेवलपमेंट गुरु और इनोवेटर ऑफ़ प्रक्टिकल मोटिवेशन जैसे नाम किसने दिये ?

उत्तर 10. पर्सनालिटी डेवलपमेंट गुरु नाम मुझे मेरे गुरु मुनि श्री प्रज्ञा सागर जी महाराज से मिला जिन्होंने जब मेरे क्लासेज लेने के तरीके के बारे में सुना, मेरी स्पीच को सुना, और मेरे विज़न को समझा तब उन्होंने कहा जब व्यक्ति सही उदेश्य से, सही दिशा में कार्य करता है तो वह गुरु होता है और आज से तेरी पहचान पर्सनलिटी डेवलपमेंट गुरु के रूप में होगी और रही बात इनोवेटर ऑफ़ प्रक्टिकल मोटिवेशन की ये नाम वर्ल्ड रिकॉर्ड वाले दिन हजारों ऑडियंस ने मिलकर दिया जब सबने कहा, सबको बहुत सुना लेकिन ऐसा लगता था किसी दूसरी दुनिया की बातें कर रहे हैं जिनका वास्तविक जिन्दगी से कोई सरोकार नहीं है लेकिन जो बातें आपसे सुनी और समझी उनका कनेक्शन हमारी वास्तविक जिन्दगी से था और आज से हम आपको इनोवेटर ऑफ़ प्रक्टिकल मोटिवेशन के रूप में जाना करेंगे |

प्रश्न 11. आपकी जिन्दगी का अंतिम उद्देश्य क्या है ?

उत्तर 11. आपके द्वारा पूछे गये सभी सवालों में ये सबसे बेहतरीन सवाल है लोग जिन्दगी प्लान करते हैं मैंने अपनी मौत भी प्लान कर रखी ये तो किसी को भी नहीं पता उसकी मृत्यु कब कंहा और कैसे होगी लेकिन हाँ फिर भी मैं या तो एक दिगम्बर जैन संत के रूप में / तिरंगे में लिपट कर मरना चाहता हूँ और निश्चित रूप से मेरे भविष्य के कदम इसी दिशा में होंगे लेकिन इससे पहले एक बार अधिकारिक रूप से भारतीय सेना की वर्दी पहनने की तीव्र इच्छा है और वो भी तीनों जल – थल और नभ – मेरा भारत मेरा अभिमान है | जिन्दगी रहते ऐसा कोई कार्य करने की इच्छा है की भारत सरकार की तरफ से ये अवसर मुझे मिले |

प्रश्न 12. आप अपनी तरफ से कुछ कहना चाहेंगे ?

उत्तर 12. जी हाँ बहुत सारी संस्थाओं ने 29 अप्रैल को प्रति वर्ष “पर्सनलिटी डेवलपमेंट डे” के रूप में सेलिब्रेट करने की घोषणा की है सभी से यही निवेदन की इस मूवमेंट को और आगे बढायें और 29 अप्रैल वर्ल्ड पर्सनलिटी डेवलपमेंट डे के रूप में मनायें जिससे लोगों में इस विषय को लेकर जागरूकता पैदा हो सके | वैसे तो प्रतिदिन हमें “Personality Development Hour”  सेलिब्रेट करना ही चाहिये |