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मम्मा कहाँ है ? ? ? ? ....
मम्मा को दिखा दो . . . . 
मम्मा को देख लूँ . . . . . . . .
मम्मा कहाँ गयी . . .
उम्र - दो साल 

मम्मी . . .कहाँ हो ? ? 
मैं स्कूल जाऊँ . . . . .
अच्छा bye 
मुझे आपकी याद आती है स्कूल में 
उम्र - चार साल 

मम्मा . . . .
लव यू 
आज टिफिन में क्या भेजोगी 
मम्मा स्कूल में बहुत होम वर्क मिला है 
उम्र - आठ साल 

पापा मम्मा कहाँ है ? ? ?
स्कूल से आते ही मम्मी नहीं दिखती तो अच्छा नहीं लगता 
उम्र - बारह साल 

मम्मी आप पास बैठो ना 
खूब सारी बातें करनी है आपसे 
उम्र - चौदह साल 

ओफ्फो मम्मी 
समझो ना . . . . 
आप पापा से कह दो ना आज पार्टी में जाने दें 
उम्र - अठारह साल 

क्या माँ . . . . ज़माना बदल रहा है 
आपको कुछ नहीं पता 
समझते ही नहीं हो 
उम्र - बाईस साल 

माँ . . . माँ . . 
जब देखो नसीहतें देती रहती हो 
मैं दुध पीता बच्चा नहीं 
उम्र - पच्चीस साल 

माँ . . . . वो मेरी पत्नी है 
आप समझा करो ना . . . 
आप अपनी मानसिकता बदलो 
उम्र - अठाईस साल 

माँ . . . . वो भी माँ है 
उसे आता हैं बच्चों को सम्भालना 
हर बात में दखलंदाजी नहीं किया करो 
उम्र - तीस साल 

और उस के बाद . . . . 
माँ को कभी पूछा ही नहीं . . 
माँ कब बूढ़ी हो गयी पता ही नहीं उसे 

माँ तो आज भी वो ही हैं . . . 
बस उम्र के साथ बच्चों के अंदाज़ बदल जाते हैं . . 

फ़िर एक दिन . . . . . 
माँ . . . माँ . . . . . चुप क्यों हो? ? ? ? 
बोलो ना . . . 
पर माँ नहीं बोलती . . . . 
खामोश हो गयी 
उम्र - पचास साल 

माँ . . . दो साल से पचास साल के इस परिवर्तन को समझ ही नहीं पायी . . 
क्योंकि माँ के लिये तो पचास साल का भी प्रौढ़ भी बच्चा ही हैं . . . .वो बेचारी तो अंत तक बेटे की छोटी सी बीमारी पर वैसे ही तड़प जाती जैसे उस के बचपन में तडपती थी....

और बेटा...माँ के जाने पर ही जान पाता है कि उसने क्या अनमोल खजाना खो दिया......

ज़िन्दगी बीत जाती हैकुछ अनकही और अनसुनी बातें बताने कहने के लिएमाँ का सदा आदर सत्कार करें,उन्हें भी समझें और कुछ अनमोल वक्त उनके साथ भी बिताएं क्योंकि वक्त गुज़र जाता है लेकिन माँ कभी वापिस नहीं मिलती
Dedicated to all mothers






कभी तानों में कटेगी, 

कभी तारीफों में;

ये जिंदगी है यारों, 

पल पल घटेगी !!

-पाने को कुछ नहीं, 

ले जाने को कुछ नहीं;

फिर भी क्यों चिंता करते हो,

इससे सिर्फ खूबसूरती घटेगी,

ये जिंदगी है यारों पल-पल घटेगी !

-बार बार रफू करता रहता हूँ,

...जिन्दगी की जेब !!

कम्बखत फिर भी, 

निकल जाते हैं...,

खुशियों के कुछ लम्हें !!

 

-ज़िन्दगी में सारा झगड़ा ही...

ख़्वाहिशों का है !!

ना तो किसी को गम चाहिए,

ना ही किसी को कम चाहिए !!

 

-खटखटाते रहिए दरवाजा...,

एक दूसरे के मन का;

मुलाकातें ना सही,

आहटें आती रहनी चाहिए !!

 

-उड़ जाएंगे एक दिन ...,

तस्वीर से रंगों की तरह !

हम वक्त की टहनी पर...,

बेठे हैं परिंदों की तरह !!

 

-बोली बता देती है,इंसान कैसा है!

बहस बता देती है, ज्ञान कैसा है!

घमण्ड बता देता है, कितना पैसा है !

संस्कार बता देते है, परिवार कैसा है !!

 

-ना राज़* है... "ज़िन्दगी",

ना नाराज़ है... "ज़िन्दगी";

बस जो है, वो आज है, ज़िन्दगी!

 

-मिलने को तो हर शख्स,

हमसे बड़े एहतराम से मिला,

पर जो भी मिला...,

किसी ना किसी काम से मिला !!

 

-जीवन की किताबों पर,

बेशक नया कवर चढ़ाइये;

पर...बिखरे पन्नों को,

पहले प्यार से चिपकाइये !!!

— Unknown
समर्थन और विरोध केवल
 विचारों का होना चाहिये..
किसी व्यक्ति का नहीं..

क्योंकि अच्छा व्यक्ति भी
गलत विचार रख सकता है

और किसी बुरे व्यक्ति का भी
कोई विचार सही हो सकता
                  है..

                                         — Unknown 
घनघोर अंधेरा छाये जब
कोई राह नज़र ना आये जब
कोई तुमको फिर बहकाये जब
इस बात पे थोड़ी देर तलक
तुम आँखें अपनी बंद करना
और अंतरमन की सुन लेना
मुमकिन है हम-तुम झूठ कहें
पर अंतरमन सच बोलेगा..........

जब लम्हा-लम्हा 'आरी' हो
और ग़म खुशियों पे भारी हो
दिल मुश्किल में जब पड़ जाये
कोई तीर सोच की 'अड़' जाये
तुम आँखें अपनी बंद करना
और अंतरमन की सुन लेना
मुमकिन है हम-तुम झूठ कहें
पर अंतरमन सच बोलेगा........

जब सच-झूठ में फर्क ना हो
जब गलत-सही में घिर जाओ
तुम नज़र में अपनी गिर जाओ
इस बात पे थोड़ी देर तलक
तुम आँखें अपनी बंद करना
और अंतरमन की सुन लेना
मुमकिन है हम-तुम झूठ कहें
पर अंतरमन सच बोलेगा........

ये जीवन एक छाया है
दुख, दर्द, मुसीबत माया है
दुनिया की भीड़ में खोने लगो
तुम खुद से दूर होने लगो
तुम आँखें अपनी बंद करना
और अंतरमन की सुन लेना
मुमकिन है हम तुम झूठ कहें
पर अंतरमन सच बोलेगा ......

                                         — Unknown 
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