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हर कोई मुश्किल कार्य से बचता है जबकि वे भूल जाता है जिन्दगी का हर पहलु एक इम्तेहान है। अक्सर सफलता वही लोग पाते हैं, जो कश्ती को समुन्द्र तक ले जाया करते हैं।

Author:- Unknown

एक बात हमेशा याद रखना दीपक हमेशा वही मिलेगा जहां अंधकार होगा फूल वहां मिलेगा जहां कांटा होगा वैसे ही ज्ञान भी वहीं मिलेगा जो उसका प्यासा होगा।

Author:- Unknown

कहीं ना कहीं कर्मों का डर है !

नहीं तो गंगा पर इतनी भीड़ क्यों है?

जो कर्म को  समझता है उसे

 धर्म को समझने की जरुरत ही नहीं

पाप शरीर नहीं करता विचार करते है

और गंगा विचारों को नहीं !

सिर्फ शरीर को धोती है |

"शब्दों का महत्व  तो !

बोलने के भाव से पता चलता है ,

वरना "वेलकम" तो

पायदान पर भी लिखा होता है"

Author:- Unknown

एक महिला की आदत थी, कि वह हर रोज सोने से पहले, अपनी दिन भर की खुशियों को एक काग़ज़ पर, लिख लिया  करती थीं.... एक रात उन्होंने लिखा :

 मैं खुश हूं, कि मेरा पति पूरी रात, ज़ोरदार खर्राटे लेता है. क्योंकि वह ज़िंदा है, और मेरे पास है. ये ईश्वर का, शुक्र है..

मैं खुश हूं, कि मेरा बेटा सुबह सबेरे इस बात पर झगड़ा करता है, कि रात भर मच्छर - खटमल सोने नहीं देते. यानी वह रात घर पर गुज़रता है, आवारागर्दी नहीं करता. ईश्वर का शुक्र है..

 मैं खुश हूं, कि, हर महीना बिजली, गैस,  पेट्रोल, पानी वगैरह का, अच्छा खासा टैक्स देना पड़ता है. यानी ये सब चीजें मेरे पास, मेरे इस्तेमाल में हैं. अगर यह ना होती, तो ज़िन्दगी कितनी मुश्किल होती ? ईश्वर का शुक्र है..

मैं खुश हूं, कि दिन ख़त्म होने तक, मेरा थकान से बुरा हाल हो जाता है. यानी मेरे अंदर दिन भर सख़्त काम करने की ताक़त और हिम्मत, सिर्फ ईश्वर की मेहर से है..

 मैं खुश हूं, कि हर रोज अपने घर का झाड़ू पोछा करना पड़ता है, और दरवाज़े -खिड़कियों को साफ करना पड़ता है. शुक्र है, मेरे पास घर तो है. जिनके पास छत नहीं, उनका क्या हाल होता होगा ? ईश्वर का, शुक्र है..

मैं खुश हूं, कि कभी कभार, थोड़ी बीमार हो जाती हूँ. यानी मैं ज़्यादातर सेहतमंद ही रहती हूं. ईश्वर का, शुक्र है..

मैं खुश हूं, कि हर साल त्यौहारो पर तोहफ़े देने में, पर्स ख़ाली हो जाता है. यानी मेरे पास चाहने वाले, मेरे अज़ीज़, रिश्तेदार, दोस्त, अपने हैं, जिन्हें तोहफ़ा दे सकूं. अगर ये ना हों, तो ज़िन्दगी कितनी बेरौनक हो..? ईश्वर का, शुक्र है..

मैं खुश हूं, कि हर रोज अलार्म की आवाज़ पर, उठ जाती हूँ. यानी मुझे हर रोज़, एक नई सुबह देखना नसीब होती है. ये भी, ईश्वर का ही करम है..

    जीने के इस फॉर्मूले पर अमल करते हुए, अपनी और अपने लोगों की ज़िंदगी, सुकून की बनानी चाहिए. छोटी या बड़ी परेशानियों में भी, खुशियों की तलाश करिए, हर हाल में, उस ईश्वर का शुक्रिया कर, जिंदगी खुशगवार बनाए..,!!!!

Author:- Unknown

आज की साखी

एक-एक भिंडी को प्यार से धोते पोंछते हुये वह काट रही थी छोटे-छोटे टुकड़ों में, फिर अचानक एक भिंडी के ऊपरी हिस्से में छेद दिख गया, शायद सोचा,  भिंडी खराब हो गई, वह फेंक देगी लेकिन नहीं, उसने ऊपर से थोड़ा काटा, कटे हुये हिस्से को फेंक दिया. फिर ध्यान से बची भिंडी को देखा, शायद कुछ और हिस्सा खराब था, उसने थोड़ा और काटा और फेंक दिया फिर तसल्ली की, बाक़ी भिंडी ठीक है कि नहीं. तसल्ली होने पर काट के सब्ज़ी बनाने के लिये रखी भिंडी में मिला दिया. मन ही मन बोली, वाह क्या बात है, पच्चीस पैसे की भिंडी को भी हम कितने ख्याल से, ध्यान से सुधारते हैं, प्यार से काटते हैं. जितना हिस्सा सड़ा है उतना ही काट के अलग करते हैं, बाक़ी अच्छे हिस्से को स्वीकार कर लेते हैं, ये तो क़ाबिले तारीफ है 

लेकिन अफसोस!

 इंसानों के लिये कठोर हो जाते हैं एक ग़लती दिखी नहीं कि उसके पूरे व्यक्तित्व को काट के फेंक देते हैं, उसके सालों के अच्छे कार्यों को दरकिनार कर देते हैं,महज अपने ईगो को संतुष्ट करने के लिए उससे हर नाता तोड़ देते हैं ।

क्या पच्चीस पैसे की एक भिंडी से भी कमतर हो गया है आदमी???

Author:- Unknown

आज की साखी

एक-एक भिंडी को प्यार से धोते पोंछते हुये वह काट रही थी छोटे-छोटे टुकड़ों में, फिर अचानक एक भिंडी के ऊपरी हिस्से में छेद दिख गया, शायद सोचा,  भिंडी खराब हो गई, वह फेंक देगी लेकिन नहीं, उसने ऊपर से थोड़ा काटा, कटे हुये हिस्से को फेंक दिया. फिर ध्यान से बची भिंडी को देखा, शायद कुछ और हिस्सा खराब था, उसने थोड़ा और काटा और फेंक दिया फिर तसल्ली की, बाक़ी भिंडी ठीक है कि नहीं. तसल्ली होने पर काट के सब्ज़ी बनाने के लिये रखी भिंडी में मिला दिया. मन ही मन बोली, वाह क्या बात है, पच्चीस पैसे की भिंडी को भी हम कितने ख्याल से, ध्यान से सुधारते हैं, प्यार से काटते हैं. जितना हिस्सा सड़ा है उतना ही काट के अलग करते हैं, बाक़ी अच्छे हिस्से को स्वीकार कर लेते हैं, ये तो क़ाबिले तारीफ है 

लेकिन अफसोस!

 इंसानों के लिये कठोर हो जाते हैं एक ग़लती दिखी नहीं कि उसके पूरे व्यक्तित्व को काट के फेंक देते हैं, उसके सालों के अच्छे कार्यों को दरकिनार कर देते हैं,महज अपने ईगो को संतुष्ट करने के लिए उससे हर नाता तोड़ देते हैं ।

क्या पच्चीस पैसे की एक भिंडी से भी कमतर हो गया है आदमी???

Author:- Unknown

पृथ्वी पर कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं है” “जिसको समस्या न हो”
और
पृथ्वी पर कोई समस्या ऐसी नहीं है” “जिसका कोई समाधान न हो…
मंजिल चाहें कितनी भी ऊँची क्यों न हो,
रास्ते हमेशा पैरों के नीचे ही होते है।

Author:- Unknown

🙏🏼प्रणाम का महत्व

 महाभारत का युद्ध चल रहा था -

एक दिन दुर्योधन के व्यंग्य से आहत होकर "भीष्म पितामह" घोषणा कर देते हैं कि -

 "मैं कल पांडवों का वध कर दूँगा

उनकी घोषणा का पता चलते ही पांडवों के शिविर में बेचैनी बढ़ गई -

 

भीष्म की क्षमताओं के बारे में सभी को पता था इसलिए सभी किसी अनिष्ट की आशंका से परेशान हो गए|       

तब -श्रीकृष्ण ने द्रौपदी से कहा अभी मेरे साथ चलो -

श्रीकृष्ण द्रौपदी को लेकर सीधे भीष्म पितामह के शिविर में पहुँच गए - शिविर के बाहर खड़े होकर उन्होंने द्रोपदी से कहा कि - अन्दर जाकर पितामह को प्रणाम करो -

 द्रौपदी ने अन्दर जाकर पितामह भीष्म को प्रणाम किया तो उन्होंने - 

"अखंड सौभाग्यवती भव" का आशीर्वाद दे दिया , फिर उन्होंने द्रोपदी से पूछा कि !!

 "वत्स, तुम इतनी रात में अकेली यहाँ कैसे आई हो, क्या तुमको श्रीकृष्ण यहाँ लेकर आये है" ?

 

  तब द्रोपदी ने कहा कि -

     "हां और वे कक्ष के बाहर खड़े हैं" तब भीष्म भी कक्ष के बाहर आ गए और दोनों ने एक दूसरे से प्रणाम किया -

 

भीष्म ने कहा -

"मेरे एक वचन को मेरे ही दूसरे वचन से काट देने का काम श्रीकृष्ण ही कर सकते है"

 

   शिविर से वापस लौटते समय श्रीकृष्ण ने द्रौपदी से कहा कि -

 

     "तुम्हारे एक बार जाकर पितामह को प्रणाम करने से तुम्हारे पतियों को जीवनदान मिल गया है " -

 

      " अगर तुम प्रतिदिन भीष्म, धृतराष्ट्र, द्रोणाचार्य, आदि को प्रणाम करती होती और दुर्योधन- दुःशासन, आदि की पत्नियां भी पांडवों को प्रणाम करती होंती, तो शायद इस युद्ध की नौबत ही न आती " -

......तात्पर्य्......

 

       वर्तमान में हमारे घरों में जो इतनी समस्याए हैं उनका भी मूल कारण यही है कि -

 

    "जाने अनजाने अक्सर घर के बड़ों की उपेक्षा हो जाती है "

 

    " यदि घर के बच्चे और बहुएँ प्रतिदिन घर के सभी बड़ों को प्रणाम कर उनका आशीर्वाद लें तो, शायद किसी भी घर में कभी कोई क्लेश न हो "

 

     बड़ों के दिए आशीर्वाद कवच की तरह काम करते हैं उनको कोई "अस्त्र-शस्त्र" नहीं भेद सकता -

 

    "निवेदन 🙏 सभी इस संस्कृति को सुनिश्चित कर नियमबद्ध करें तो घर स्वर्ग बन जाय।"

 

              क्योंकि:-

 

        प्रणाम प्रेम है।

        प्रणाम अनुशासन है।

        प्रणाम शीतलता है।                  

        प्रणाम आदर सिखाता है।

        प्रणाम से सुविचार आते है।

        प्रणाम झुकना सिखाता है।

        प्रणाम क्रोध मिटाता है।

        प्रणाम आँसू धो देता है।

        प्रणाम अहंकार मिटाता है।

        प्रणाम हमारी संस्कृति है।

पेड़ के नीचे रखी भगवान की टूटी मूर्ति को देख कर समझ आया, 

कि..

परिस्थिति चाहे कैसी भी हो, 

पर कभी ख़ुद को

टूटने नही देना..

वर्ना ये दुनिया 

जब टूटने पर भगवान को 

घर से निकाल सकती है

तो फिर हमारी तो 

औकात ही क्या है ... 

Author:- Unknown

एयर-फोर्स कमांडर 

आन्नद एक पायलट था। 

 

एक लड़ाई में उसके फाइटर प्लेन पर 

एक मिसाइल लगी 

पर वह पैराशूट की सहायता से बच गया ।

 

उसने कई अवार्ड जीते 

और कई मेडल भी।

 

5 साल बाद एक दिन रेस्टोरेंट में आन्नद अपनी पत्नी के साथ बैठा था।

 

एक आदमी दूसरी टेबल से उसके पास आया और पूछा "आप कैप्टन आन्नद हो ना ?

 

जो फाइटर प्लेन चलाते थे ?

 जिसके प्लेन पर मिसाइल लगी थी ?

आन्नद ने आश्चर्य से पूछा

 "आपको कैसे पता" ?

वह आदमी मुस्कुराया 

और उस ने जवाब दिया 

कि उस दिन "मैंने ही तुम्हारा पैराशूट पैक किया था"

 

आन्नद आश्चर्यचकित हो गया

 और उसने सोचा कि

 यदि उसके पैराशूट ने उस दिन काम नहीं किया होता तो

 वह आज यहां नहीं होता

 

वह पूरी रात सो नहीं पाया सिर्फ उस आदमी के बारे में सोचता रहा 

 

की मैंने इस आदमी को कितनी बार देखा पर कभी  गुड मॉर्निंग, आप कैसे हो , नही कहा

क्योंकि मैं फाइटर पायलट था

 और वह आदमी सिर्फ एक सेफ्टी वर्कर।

 

इसलिए दोस्तों यह हमेशा ध्यान रखें कि 

आपका पैराशूट कौन पैक कर रहा है ?

 

हर आदमी के साथ ऐसा कोई है जिससे हमारा जीवन चलता है।

 

 हमें जीवन में बहुत सारे पैराशूट की जरूरत पड़ती है

 

जब हमारा प्लेन गिर जाता है 

हमें कई बार फिजिकल पैराशूट लगता है,

कई बार मेंटल पैराशूट, 

कई बार इमोशनल पैराशूट,

 स्पिरिचुअल पैराशूट और 

फाइनेंशियल पैराशूट भी लगता है।

 

हम इन सब को सपोर्ट बोल सकते हैं 

सुरक्षित होने के पहले का सपोर्ट 

 

और कई बार जीवन की आपाधापी में हम हेलो, प्लीज, थैंक्यू कहना और बधाई देना भूल जाते हैं 

 कि यह सब चीजें भी महत्व रखती हैं

 

मैं उन सब लोगों को धन्यवाद देना चाहता हूं जिन्होंने 2018 में मेरा पैराशूट पैक करने में मेरी मदद की ,शब्दों से, भावनाओं से या किसी और तरीके से मेरे लिए 2019 का रास्ता आगे बढ़ाया

Author:- Unknown

संस्कार क्या है.... 

 

एक राजा के पास सुन्दर घोड़ी थी । कई बार युद्व में इस घोड़ी ने राजा के प्राण बचाये और घोड़ी राजा के लिए पूरी वफादार थी,कुछ दिनों के बाद इस घोड़ी ने एक बच्चे को जन्म दिया, बच्चा काना पैदा हुआ, पर शरीर हृष्ट पुष्ट व सुडौल था ।बच्चा बड़ा हुआ, बच्चे ने मां से पूछा: मां मैं बहुत बलवान हूँ, पर काना हूँ.. यह कैसे हो गया, इस पर घोड़ी बोली: बेटा जब मैं गर्भवती थी, तू पेट में था तब राजा ने मेरे उपर सवारी करते समय मुझे एक कोड़ा मार दिया, जिसके कारण तू काना हो गया ।यह बात सुनकर बच्चे को राजा पर गुस्सा आया और मां से बोला: मां मैं इसका बदला लूंगा ।मां ने कहा राजा ने हमारा पालन-पोषण किया है, तू जो स्वस्थ है.. सुन्दर है, उसी के पोषण से तो है, यदि राजा को एक बार गुस्सा आ गया तो इसका अर्थ यह नहीं है कि हम उसे क्षति पहुचायें,पर उस बच्चे के समझ में कुछ नहीं आया, उसने मन ही मन राजा से बदला लेने की सोच ली ।एक दिन यह मौका घोड़े को मिल गया.. राजा उसे युद्व पर ले गया । युद्व लड़ते-लड़ते राजा एक जगह घायल हो गया, घोड़ा उसे तुरन्त उठाकर वापिस महल ले आया ।इस पर घोड़े को ताज्जूब हुआ और मां से पूछा: मां आज राजा से बदला लेने का अच्छा मौका था, पर युद्व के मैदान में बदला लेने का ख्याल ही नहीं आया और न ही ले पाया, मन ने गवाही नहीं दी.. इस पर घोडी हंस कर बोली: बेटा तेरे खून में और तेरे संस्कार में धोखा है ही नहीं, तू जानबूझकर तो धोखा दे ही नहीं सकता है ।तुझसे नमक हरामी हो नहीं सकती, क्योंकि तेरी नस्ल में तेरी मां का ही तो अंश है ।

वाकई.. यह सत्य है कि जैसे हमारे संस्कार होते हैं, वैसा ही हमारे मन का व्यवहार होता है, हमारे पारिवारिक-संस्कार अवचेतन मस्तिष्क में गहरे बैठ जाते हैं, माता-पिता जिस संस्कार के होते हैं, उनके बच्चे भी उसी संस्कारों को लेकर पैदा होते हैं हमारे कर्म ही 'संस्‍कार' बनते हैं और संस्कार ही प्रारब्धों का रूप लेते हैं ! यदि हम कर्मों को सही व बेहतर दिशा दे दें तो संस्कार अच्छे बनेगें और संस्कार अच्छे बनेंगे तो जो प्रारब्ध का फल बनेगा, वह मीठा व स्वादिष्ट होगा ।

*अत: हमें प्रतिदिन कोशिश करनी चाहिए कि हमसे जानबूझकर कोई गलत काम ना हो और हम किसी के साथ कोई छल कपट या धोखा भी ना करें। बस, इसी से ही स्थिति अपने आप ठीक होती जायेगी!! और हर परिस्थिति में प्रभु की शरण ना छोड़ें तो अपने आप सब अनुकूल हो जाएगा ।

 

Author:- Unknown

जिस दिन हम ये समझ जायेंगे कि

     सामने वाला गलत नहीं है सिर्फ

       उसकी सोच हमसे अलग है

             उस दिन जीवन से 

         दुःख समाप्त हो जायेंगे

 

"बड़प्पन" वह गुण है जो पद से नहीं

    "संस्कारों" से प्राप्त होता है।

Author:- Unknown

मॉर्निग वॉक के प्रकार:

1-      डॉ. के कहने से पहले जो टहलते है

         उसे " मॉर्निग वॉक " कहते हैं।

2-    डॉ. के कहने के बाद जो टहलते है 

         उसे " वॉरर्निंग वॉक " कहते हैं 

3-     जो अपनी पत्नी  या पति के कहने पर 

टहलने जाते है उसे डार्लिग वॉक कहते हैं     

4-   जो दुसरो की सेहत से जलन महसूस कर टहलने जाते हैं उसे" बर्निंग वॉक "कहते हैं 

5-   जो अपनी पत्नी के साथ टहलने के बावजूद दूसरी महिलाओं को मुड़ मुड़ कर देखते-देखते टहलते  है उसे " टर्निंग वॉक " कहते है

Author:- Unknown

मयस्सर डोर से फिर एक मोती 

झड़ रहा है....

तारीख़ों के जीने से दिसम्बर उतर 

रहा है..!!

 

कुछ चेहरे घटे,चंद यादें जुड़ी गए 

वक़्त में....

उम्र का पंछी नित दूर और दूर 

उड़ रहा है..!!

 

गुनगुनी धूप और ठिठुरी रातें

जाड़ों की....

गुज़रे लम्हों पर झीना-झीना पर्दा 

गिर रहा है..!!

 

ज़ायका लिया नहीं और फिसल 

रही ज़िन्दगी....

आसमां समेटता वक़्त बादल बन

उड़ रहा है..!!

 

फिर एक दिसम्बर गुज़र रहा है....

Author:- Unknown

जिन्दगी का एक और वर्ष कम हो चला,

कुछ पुरानी यादें पीछे छोड़ चला..

 

कुछ ख्वाइशें दिल में रह जाती हैं..

कुछ बिन मांगे मिल जाती हैं ..

 

कुछ छोड़ कर चले गये..

कुछ नये जुड़ेंगे इस सफर में .. 

 

कुछ मुझसे बहुत खफा हैं.. 

कुछ मुझसे बहुत खुश हैं.. 

 

कुछ मुझे मिल के भूल गये..

कुछ मुझे आज भी याद करते हैं..

 

कुछ शायद अनजान हैं..

कुछ बहुत परेशान हैं..

 

कुछ को मेरा इंतजार हैं ..

कुछ का मुझे इंतजार है.. 

 

कुछ सही है

कुछ गलत भी है.

कोई गलती तो माफ कीजिये और

कुछ अच्छा लगे तो याद कीजिये।

Author:- Unknown

एक पढ़ने योग्य कहानी!

 

एक छोटे व्यापारी ने साहूकार से उधार में रुपए लिए किंतु निर्धारित समय पर लौटा नहीं पाया। साहूकार बूढा और बदसूरत था लेकिन उस व्यापारी की खूबसूरत, जवान बेटी पर निगाह रखता था।

साहूकार ने व्यापारी से कहा कि, अगर वो अपनी बेटी का विवाह उससे कर दे तो वह उधार की रकम ब्याज सहित भूल जाएगा।

 

व्यापारी और उसकी बेटी, साहूकार के इस सौदे से परेशान हो उठे।

 

साहूकार, व्यापारी से बोला, " मैं एक खाली थैली में एक सफ़ेद और एक काला कंकड़ रखता हूँ। तुम्हारी बेटी बिना देखे थैली से एक कंकड़ बाहर निकालेगी। अगर उसने काला कंकड़ निकाला तो उसे मुझसे विवाह करना होगा और तुम्हारा सारा कर्ज माफ कर दिया जाएगा।

अगर उसने सफ़ेद कंकड़ निकाला तो, उसे मुझसे शादी नहीं करनी पड़ेगी और तुम्हारा कर्ज भी माफ़ कर दिया जाएगा।

लेकिन अगर तुम्हारी बेटी थैली से कंकड़ निकालने से इन्कार करेगी तो मैं तुम्हें जेल भिजवा दूँगा। "

 

इस समय साहूकार, व्यापारी और उसकी बेटी, व्यापारी के बगीचे के उस रास्ते पर खड़े थे जिसपर सफ़ेद और काली मिक्स बजरी बिछी हुई थी।

फिर सौदे के अनुसार साहूकार ने झुककर उस बिछी हुई बजरी में से दो कंकड़ उठाए और अपने हाँथ में पकड़ी हुई खाली थैली में उन्हें डाल दिया।

साहूकार जब कंकड़ उठा रहा था तब, बेटी ने अपनी तीखी नजरों से ये देख लिया कि, बेईमान साहूकार ने बजरी में से दोनों कंकड़ काले रंग के ही उठाए और थैली में डाले हैं।

फिर साहूकार ने लड़की से कहा कि, वो थैली में से एक कंकड़ निकाले।

 

तो, अगर आप उस लड़की की जगह होते तो, आप क्या करते ???

या अगर आप से कहा जाता कि, आप उस लड़की को सही सलाह दीजिए तो आप क्या सलाह देते ??

 

ध्यान से देखा जाए तो तीन संभावनाएँ हैं :

1. लड़की कंकड़ निकालने से इन्कार कर देगी।

2. लड़की बोल देगी कि, साहूकार ने बेईमानी की है और दोनों काले कंकड़ ही थैली में डाले हैं।

3. लड़की एक काला कंकड़ निकाल कर अपनी जिंदगी से समझौता कर लेगी और अपने पिता को कर्ज और जेल से बचाएगी।

 

इस कहानी में अच्छा-बुरा, दिल-दिमाग, होनी-अनहोनी की अजीबोगरीब जंग है।

 

अपने दिमाग से जवाब दे इस परिस्थिति मे इस कहानी को आप किस तरह हल करेंगे.........................

Author:- Unknown

 स्वीकार करने की हिम्मत

                      और

      सुधार करने की नीयत हो

                       तो

    इंसान बहुत कुछ सीख सकता है।

    हमको कितने लोग पहचानते है ?

            उसका महत्व नहीं है,

       लेकिन क्यों पहचानते है..?

                इसका महत्व है. . .

Author:- Unknown

आज एक छोटा सा संकल्प करें और बदलाव का हिस्सा बने 🙏🏻

हम चाहे बड़े-बड़े कार्य कर सके या ना कर सके, पर छोटे छोटे कार्य के द्वारा दूसरों के जीवन में खुशियां भरने का काम तो हम कर ही सकते हैं🎉

>हम किसी को मुसीबत के समय दिलासा तो दे ही सकते हैं

>हम किसी को प्रेरणा के दो शब्द तो बोल ही सकते हैं

>हम किसी को अपने समय का एक अंश तो दे ही सकते हैं

>हम अपनी मुस्कान द्वारा किसी के चेहरे पर मुस्कान खिलाने का तो कार्य कर ही सकते हैं 😊

ऐसा बहुत कुछ है जो हम कर सकते हैं पर करते नहीं 

चलिए, इस बार यह कोशिश करते हैं,आपकी ये कोशिश ना जाने कितनों के जीवन में नयी रोशनी लायेगी

Author:- Unknown

शब्दकोश में बहोत शब्द है, और रोज नए जुड़ते रहते है ।

 

हम किन शब्दों का चयन करते है वो हमारी वैचारिक क्षमता ( स्तर ) को उजागर करता है ।

 

इसलिए जब भी शब्दों का चयन करो तब यह सोच समझ कर करना ।

 

बोले हुए शब्द तो शायद कुछ समय बाद अपना असर कम कर देते है, पर लिखे हुए शब्द, जब भी पढ़े जाएंगे, अपना असर छोड़ेंगे ।

Author:- Unknown

।।।।।   निभाना और संभालना   ।।।।।

 

एक में समर्पण और एक में समझौता ।

 

जिन बातों को संभालते है, उनमें समझौता करना पड़ता है।

 

और जिन्हें निभाते है वहाँ समर्पित होते है ।

 

रिश्तों का भी ऐसा ही है ।

 

जिसे निभा नहीं सकते, उसे संभालते है ।

 

सोचना और चिंतन करना चाहिए कि हम क्या कर रहे है ।

 

" अबोध "

Author:- Unknown

A Few Truths of life…..

 

 

We're all looking for truth in life. What is right, what is wrong, what is best to have. If there are a few real truths to life I've learned along the way, they would probably look something like this...

 

The first necessity: To communicate

 

The greatest happiness: To be useful to others

 

The greatest mystery: Death

 

The most beautiful day: Today

 

The easiest thing: Equivocate

 

The biggest obstacle: Fear

 

The gravest error: give up, to despair

 

The root of all evils: Egoism

 

The most beautiful occupation: Work

 

The worst route to follow: Faint-heartedness

 

The best teachers: Children

 

The worst defect: Bad temper

 

The most dangerous being: The liar'

 

The most wretched feeling: The grudge

 

The most beautiful gift: Forgiveness

 

The most indispensable: home

 

The quickest way: The correct one

 

The most comfortable feeling: Interior peace

 

The most powerful weapon: The smile

 

The best remedy: Optimism

 

The greatest satisfaction: The duty done

 

The most powerful force: Faith

 

The most needed beings: The parents

 

The most beautiful of all: Love!

 

Life without love - loses meaning!

Author:- Unknown

वो पिता होता है

वो पिता  ही होता है

जो अपने बच्चो को अच्छे

विद्यालय में पढ़ाने के लिए

दौड भाग करता है...

उधार लाकर donation भरता

है, जरूरत पड़ी तो किसी के भी

हाथ पैर भी पड़ता है

....... वो पिता होता हैं ।

हर कॉलेज में साथ साथ

घूमता है, बच्चे के रहने के

लिए होस्टल ढुँढता है...

स्वतः फटे कपडे पहनता है

और बच्चे के लिए नयी जीन्स

टी-शर्ट लाता है

.... वो पिता होता है ।

खुद खटारा फोन  चलाता है पर

बच्चे के लिए स्मार्ट फोन लाता है...

बच्चे की एक आवाज सुनने के

लिए, उसके फोन  में पैसा भराता है

....... वो पिता  होता है ।

बच्चे के प्रेम विवाह के निर्णय पर

वो नाराज़ होता है और गुस्से

में कहता है सब ठीक से देख

लिया है ना, "आप कुछ

समझते भी है?" यह सुन कर

बहुत रोता है

.......वो पिता होता हैं ।।

बेटी की विदाई पर दिल की

गहराई से रोता है,

मेरी बेटी का ख्याल रखना हाथ

जोड़ कर कहता है

......... वो पिता होता है ।।

पिता का प्यार दिखता नहीं है

सिर्फ महसूस किया जाता है।

माँ पर तो बहुत कविता लिखी

गयी है पर पिता पर नहीं।

मैं पिता पर चार लाइन लिखता हूँ

  पिता रोटी है कपड़ा है मकान है पिता नन्हे से परिंदे का बड़ा आसमान है पिता है तो घर में प्रतिपल राग है पिता से मां की चूड़ी बिंदी और सुहाग है पिता है तो बच्चो के सारे सपने है पिता है तो बाजार के सारे खिलौने अपने है

पिता का प्यार क्या है दुनिया

को बता दो।  

 पापा जब दुखी होते हैं तो माँ की तरह नहीं रोते। शायद इसलिए 90% पापा हार्ट अटैक से मर जाते हैं।

क्योंकि पापा.....पापा होते हैं

Author:- Unknown

Personality Development Services in Jaipur, Personality Development Classes in Jaipur, Personality Development Institute in Jaipur

I asked my friend who was having a Rs 60,000/- bike, which fuel he was using.
He replied, it's Petrol.

When I asked why don't you try Kerosene?  His reply was, the engine will be spoiled.

I again asked him, do you drink alcohol??

He quietly said 'yes'.

When I questioned, won't it spoil your engine???

He humbly replied, it's only occasionally...

My question is, can we pour kerosene occasionally in our bike for a change???

No - we cannot.

We give more value to our Rs 60000 bike but not for our life.

Our life is more valuable and more Important. So make a wise choice.

Author:- Unknown

Personality Development Services in Jaipur, Personality Development Classes in Jaipur, Personality Development Institute in Jaipur

एक_अंधा...भीख मांगता हुआ राजा के द्वार पर पंहुचा।

राजा को दया आ गयी,

राजा ने प्रधानमंत्री से कहा,- "यह भिक्षुक जन्मान्ध नहीं है, यह ठीक हो सकता है, इसे राजवैद्य के पास ले चलो।"

रास्ते में मंत्री कहता है, "महाराज *यह भिक्षुक शरीर से हृष्ट-पुष्ट है, यदि इसकी रोशनी लौट आयी तो इसे आपका सारा भ्र्ष्टाचार दिखेगा, आपकी शानोशौकत और फिजूलखर्ची दिखेगी।

आपके राजमहल की विलासिता और रनिवास का अथाह खर्च दिखेगा,
इसे यह भी दिखेगा कि जनता भूख और प्यास से तड़प रही है, सूखे से अनाज का उत्पादन हुआ ही नहीं, और आपके सैनिक पहले से चौगुना लगान वसूल रहे हैं।
शाही खर्चे में बढ़ोत्तरी के कारण राजकोष रिक्त हो रहा है, जिसकी भरपाई हम सेना में कटौती करके कर रहे हैं, इससे हजारों सैनिक और कर्मचारी बेरोजगार हो गए हैं।
ठीक होने पर यह भी औरों की तरह ही रोजगार की मांग करेगा और आपका ही विरोधी बन जायेगा।

मेरी मानिये तो...
यह आपसे मात्र दो वक्त का भोजन ही तो मांगता है,

इसे आप राजमहल में बैठाकर मुफ्त में सुबह-शाम भोजन कराइये
और
दिन भर इसे घूमने के लिए छोड़ दीजिये।

यह  _पूरे राज्य में आपका गुणगान करता फिरेगा,_ कि...
राजा बहुत न्यायी हैं, बहुत ही दयावान और परोपकारी हैं।

इस तरह मुफ्त में खिलाने से आपका संकट कम होगा
और...
आप लंबे समय तक शासन कर सकेंगे।"

राजा को यह बात समझ में आ गयी,

वह वापस अंधे के पास गया और दोनों उसे उठाकर राजमहल ले आये।

अब अँधा राजा का पूरे राज्य में गुणगान करता फिरता है,*

उसे यह नहीं पता कि राजा ने उसके साथ धूर्तता की है,
छल किया है,
_
वह ठीक होकर स्वयं कमा कर अपनी आँखों से संसार का आनंद ले सकता था।_

यही हाल सरकारें करती हैं, हमे मुफ्त का लालच देती हैं,
किंतु...
_
आँखों की रोशनी (अच्छी शिक्षा व रोजगार) नहीं देतीं,_
जिससे कि हम उनका भ्रष्टाचार देख पाएं,
उनकी फिजूलखर्जी और गुंडागर्दी देख पाएं,
उनका शोषण और अन्याय देख पाएं।

और हम अंधे की तरह उनका गुणगान करते हैं, कि राजा मुफ्त में सबको सामान देते हैं।

हम यह नहीं सोचते कि यदि हमें अच्छी शिक्षा और रोजगार सरकारें दें, तो...
हमें उनकी खैरात की जरूरत न होगी, हम स्वतः ही सब खरीद सकते हैं। पर...

हम सभी अंधे जो ठहरे, केवल मुफ्त की चीजें ही हमें दिखती हैं।


Author:- Unknown

मम्मा कहाँ है ? ? ? ? ....
मम्मा को दिखा दो . . . . 
मम्मा को देख लूँ . . . . . . . .
मम्मा कहाँ गयी . . .
उम्र - दो साल 

मम्मी . . .कहाँ हो ? ? 
मैं स्कूल जाऊँ . . . . .
अच्छा bye 
मुझे आपकी याद आती है स्कूल में 
उम्र - चार साल 

मम्मा . . . .
लव यू 
आज टिफिन में क्या भेजोगी 
मम्मा स्कूल में बहुत होम वर्क मिला है 
उम्र - आठ साल 

पापा मम्मा कहाँ है ? ? ?
स्कूल से आते ही मम्मी नहीं दिखती तो अच्छा नहीं लगता 
उम्र - बारह साल 

मम्मी आप पास बैठो ना 
खूब सारी बातें करनी है आपसे 
उम्र - चौदह साल 

ओफ्फो मम्मी 
समझो ना . . . . 
आप पापा से कह दो ना आज पार्टी में जाने दें 
उम्र - अठारह साल 

क्या माँ . . . . ज़माना बदल रहा है 
आपको कुछ नहीं पता 
समझते ही नहीं हो 
उम्र - बाईस साल 

माँ . . . माँ . . 
जब देखो नसीहतें देती रहती हो 
मैं दुध पीता बच्चा नहीं 
उम्र - पच्चीस साल 

माँ . . . . वो मेरी पत्नी है 
आप समझा करो ना . . . 
आप अपनी मानसिकता बदलो 
उम्र - अठाईस साल 

माँ . . . . वो भी माँ है 
उसे आता हैं बच्चों को सम्भालना 
हर बात में दखलंदाजी नहीं किया करो 
उम्र - तीस साल 

और उस के बाद . . . . 
माँ को कभी पूछा ही नहीं . . 
माँ कब बूढ़ी हो गयी पता ही नहीं उसे 

माँ तो आज भी वो ही हैं . . . 
बस उम्र के साथ बच्चों के अंदाज़ बदल जाते हैं . . 

फ़िर एक दिन . . . . . 
माँ . . . माँ . . . . . चुप क्यों हो? ? ? ? 
बोलो ना . . . 
पर माँ नहीं बोलती . . . . 
खामोश हो गयी 
उम्र - पचास साल 

माँ . . . दो साल से पचास साल के इस परिवर्तन को समझ ही नहीं पायी . . 
क्योंकि माँ के लिये तो पचास साल का भी प्रौढ़ भी बच्चा ही हैं . . . .वो बेचारी तो अंत तक बेटे की छोटी सी बीमारी पर वैसे ही तड़प जाती जैसे उस के बचपन में तडपती थी....

और बेटा...माँ के जाने पर ही जान पाता है कि उसने क्या अनमोल खजाना खो दिया......

ज़िन्दगी बीत जाती हैकुछ अनकही और अनसुनी बातें बताने कहने के लिएमाँ का सदा आदर सत्कार करें,उन्हें भी समझें और कुछ अनमोल वक्त उनके साथ भी बिताएं क्योंकि वक्त गुज़र जाता है लेकिन माँ कभी वापिस नहीं मिलती
Dedicated to all mothers

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एक वृद्ध ट्रेन में सफर कर रहा थाराम नाम की माला घुमाते।

 संयोग से वह कोच खाली था।

 8-10 लड़के उस कोच में आये और बैठ कर मस्ती करने लगे,

 एक ने कहा चलो जंजीर खीचते हैदूसरे ने कहा यहां लिखा है 

500 रु जुर्माना और 6माह की कैद

तीसरे ने कहा इतने लोग है चंदा कर के 500 रु जमा कर देंगे। 

रुपये चन्दा किये गये तो 500 की जगह 1200 रु जमा हो गए

इसे पहले लड़के की जेब में रख दिया गया। 

तीसरे लड़के ने कहाजंजीर खीचते है

अगर कोई पूछा तो कह देंगे बूढ़े ने खीचा है।

पैसे भी नही देने पड़ेंगे अब। 

बूढ़े ने हाथ जोड़ के कहा

बच्चो मैने तुम्हारे क्या बिगड़ा है

मुझे क्यो फसा रहे हो लेकिन किसी को दया नही आई। 

जंजीर खीची गई टी टी ई

आया सिपाही के साथलड़कों ने एक स्वर से कहा बूढ़े ने जंजीर खीची है। 

टी टी बूढ़े से शर्म नही आती इस उम्र में ऐसी हरकत करते हुए

बूढ़े ने हाथ जोड़ कर कहा साहब हां मैंने जंजीर खिंची है।

लेकिन मेरी बहुत मजबूरी थी।

तो पूछा क्या मजबूरी थी,

 बूढ़े ने कहा मेरे पास केवल 1200 रु थे जिसे इन लड़को ने छीन लिया

और इस लड़के के जेब मे रखा है। 

अब टीटी ने सिपाही से कहा इसकी तलाशी लो

लड़के की जेब से 1200 रु बरामद हुए जो वृद्ध को वापस कर दिये गये

और लड़कों को अगले स्टेशन में पुलिस के हवाले कर दिया गया।

ले जाते समय लड़के ने वृद्ध की ओर देखा,

वृद्ध ने सफेद दाढ़ी में हाथ फेरते हुये कहा

तेरे जैसे मेरे घर में घूम रहे हैं।

कभी तानों में कटेगी, 

कभी तारीफों में;

ये जिंदगी है यारों, 

पल पल घटेगी !!

-पाने को कुछ नहीं, 

ले जाने को कुछ नहीं;

फिर भी क्यों चिंता करते हो,

इससे सिर्फ खूबसूरती घटेगी,

ये जिंदगी है यारों पल-पल घटेगी !

-बार बार रफू करता रहता हूँ,

...जिन्दगी की जेब !!

कम्बखत फिर भी, 

निकल जाते हैं...,

खुशियों के कुछ लम्हें !!

 

-ज़िन्दगी में सारा झगड़ा ही...

ख़्वाहिशों का है !!

ना तो किसी को गम चाहिए,

ना ही किसी को कम चाहिए !!

 

-खटखटाते रहिए दरवाजा...,

एक दूसरे के मन का;

मुलाकातें ना सही,

आहटें आती रहनी चाहिए !!

 

-उड़ जाएंगे एक दिन ...,

तस्वीर से रंगों की तरह !

हम वक्त की टहनी पर...,

बेठे हैं परिंदों की तरह !!

 

-बोली बता देती है,इंसान कैसा है!

बहस बता देती है, ज्ञान कैसा है!

घमण्ड बता देता है, कितना पैसा है !

संस्कार बता देते है, परिवार कैसा है !!

 

-ना राज़* है... "ज़िन्दगी",

ना नाराज़ है... "ज़िन्दगी";

बस जो है, वो आज है, ज़िन्दगी!

 

-मिलने को तो हर शख्स,

हमसे बड़े एहतराम से मिला,

पर जो भी मिला...,

किसी ना किसी काम से मिला !!

 

-जीवन की किताबों पर,

बेशक नया कवर चढ़ाइये;

पर...बिखरे पन्नों को,

पहले प्यार से चिपकाइये !!!

Author:- Unknown

समर्थन और विरोध केवल विचारों का होना चाहिये.. किसी व्यक्ति का नहीं.. क्योंकि अच्छा व्यक्ति भी गलत विचार रख सकता है और किसी बुरे व्यक्ति का भी कोई विचार सही हो सकता है..

Author:- Unknown

घनघोर अंधेरा छाये जब कोई राह नज़र ना आये जब कोई तुमको फिर बहकाये जब इस बात पे थोड़ी देर तलक तुम आँखें अपनी बंद करना और अंतरमन की सुन लेना मुमकिन है हम-तुम झूठ कहें पर अंतरमन सच बोलेगा.......... जब लम्हा-लम्हा 'आरी' हो और ग़म खुशियों पे भारी हो दिल मुश्किल में जब पड़ जाये कोई तीर सोच की 'अड़' जाये तुम आँखें अपनी बंद करना और अंतरमन की सुन लेना मुमकिन है हम-तुम झूठ कहें पर अंतरमन सच बोलेगा........ जब सच-झूठ में फर्क ना हो जब गलत-सही में घिर जाओ तुम नज़र में अपनी गिर जाओ इस बात पे थोड़ी देर तलक तुम आँखें अपनी बंद करना और अंतरमन की सुन लेना मुमकिन है हम-तुम झूठ कहें पर अंतरमन सच बोलेगा........ ये जीवन एक छाया है दुख, दर्द, मुसीबत माया है दुनिया की भीड़ में खोने लगो तुम खुद से दूर होने लगो तुम आँखें अपनी बंद करना और अंतरमन की सुन लेना मुमकिन है हम तुम झूठ कहें पर अंतरमन सच बोलेगा ......

Author:- Unknown

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